Types of Trading Systems | Stock Exchange | Capital Market | Management

The following points highlight the three main types of trading systems in a stock exchange. The systems are: 1. Screen Based Trading System 2. Scripless Trading 3. Demat Trading.

Type # 1. Screen Based Trading System:

The stock exchanges now provide an on-line fully automated ‘screen based trading system (SBTS)’.

The Important Features of SBTS:

1. A member can स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार punch into the computer quantities of securities and the prices at which he likes to transact and the transaction is executed as soon as it finds a matching order from a counter party.

2. SBTS electronically matches orders स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार on a strict price/time priority.

3. It cuts down on time, cost and risk of error, as well as fraud resulting in improved operational efficiency.

4. It allows faster incorporation of price sensitive information into prevailing prices, and enables increasing the informational efficiency of markets.

5. It enables market participants to see the full market on real time, making the market transparent.

6. It allows a large number of participants, irrespective of geographical location, to trade with one another simultaneously, improving the depth and liquidity of the market.

7. It provides full anonymity by accepting orders of small, from members without revealing their identity, thus providing equal access to everybody.

8. It also provides a perfect audit trail, which helps to resolve disputes by logging in the trade execution process in entirety.

Type # 2. Scripless Trading:

1. Scripless trading is a method of securities trading in which the settlement of transactions take place via book entry instead of physical exchange and delivery of securities certificates.

2. The major objective of introducing scripless trading is to ensure the safety of securities certificates and to improve the liquidity position of the stock markets both in primary and secondary markets.

3. The major advantages of the scripless trading system are as follows:

(i) Reduction in paper work of stock brokers and stock exchanges.

(ii) Ensure safety of certificates from theft, fake certificates, mutilation etc.

(iii) Reduction in cumbersome share transfer procedures.

(iv) Greater speed in exchange and delivery of securities certificates.

(v) Improves liquidity of both the individual scrips and stock market position.

Type # 3. Demat Trading:

1. In a demat trading, the depositories maintain and transfer ownership records in electronic form for the wide range of corporate securities and money market instruments, in dematerialized form.

2. The investors are allowed to hold securities either in physical form or demat form.

3. When an investor intend to keep his securities in demat form, he is required to hold the securities in depositories.

4. Now all active securities are traded and settled in demat form. At present, nearly 99% of turnover on stock exchanges are traded and settled in demat form.

5. All new IPOs are required to be traded only in demat form. All stock exchange listed securities are asked to be in demat form. Stamp duty on transfer of demat securities have been abolished.

6. Demat securities are preferred as collateral in providing security to a debt.

7. The demat trading is made compulsory for money market instruments like government note issuance, treasury bills, etc.

ट्रेडिंग के कितने प्रकार होते है ? – Types Of Trading In Hindi

कुछ लोग Trading के अलग-अलग प्रकारों के बारे में जानते हैं, जिसके कारण वे अधिक लाभ कमाते हैं, परंतु कुछ अन्य लोगों को Types Of Trading In Hindi के बारे में जानकारी ना होने के कारण अपने पैसे Stock Trading में गवा देते हैं।

इसलिए सभी निवेशकों को Types Of Trading In Hindi के बारे में संपूर्ण जानकारी होना आवश्यक है। इसीलिए आज के इस लेख में हम ट्रेडिंग के सभी प्रकार को विस्तृत रूप से जानेंगे।

Trading के प्रकार कौन से हैं ? ( Types Of Trading In Hindi )

मुख्य रूप से Trading के प्रकारों को पांच भागों में बांटा गया है। यदि हम Stock Trading की बात करें तो यह पांच प्रकार की होती है जो निम्नलिखित है।

  1. Intraday Trading
  2. Scalping
  3. Swing Trading
  4. Delivery Trading
  5. Optional Trading
  6. Momentum Trading
  7. Positional Trading
  8. Technical Trading

1. इंट्राडे ट्रेडिंग ( Intraday Trading )

Intraday Trading को हम Day Trading भी कहते हैं। इस Trading के अंतर्गत स्टॉक को एक ही दिन में बेचना और खरीदना शामिल होता है।

यदि कोई भी Investor या Trader Intraday Trading करता है, तो उसे दिन के आखिरी में बाजार बंद होने से पहले अपने सभी खरीदे गए शेयरों को जरूर भेजना होता है।

Intraday Trading सबसे ज्यादा Nav Value के छोटे पैमाने पर होने वाले उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए लोकप्रिय है। यदि Trader अधिक Margin money का उपयोग नहीं करता है तो Intraday Trading बहुत ही कम जोखिम वाला होता है।

2. स्काल्पिंग ( Scalping )

स्काल्पिंग को Micro-Trading भी कहा जाता है, क्योंकि इस Trading को करते समय बहुत ही ज्यादा समय लगता है। स्काल्पिंग भी Intraday Trading की तरह ही की जाती है। बस इसके अंतर्गत Trader अपने Stock को कुछ सेकंड से लेकर कुछ मिनट तक hold रखता है।

जिस तरह Day Trading के अंतर्गत बाजार बंद होने से पहले सभी खरीदे गए स्टॉक को बेचना पड़ता है उसी प्रकार Scalp में भी बाजार बंद होने से पहले अपने पोजीशन को बंद करना पड़ता है।

Intraday Trading की तरह ही इसमें भी Technical Analysis बाजार से संबंधित ज्ञान और Price trend के बारे में जागरुकता और समझ बनती है।

3. स्विंग ट्रेडिंग ( Swing Trading )

स्विंग Trading का उपयोग Traders द्वारा Short Term Stock Fund और स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार Pattern को Trade करने के लिए किया जाता है। साथ ही Traders इसका उपयोग कई दिनों में एक अच्छा लाभ कमाने के लिए करते हैं। क्योंकि Trading के इस प्रकार में हम 1 दिन से 7 दिन तक Trading कर सकते हैं।

इसमें Traders अपने शेयरों का Technical Analysis करते हैं ताकि वे अपने Investment के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए Stock Market के Pattern का पालन कर सकें।

4. डिलीवरी ट्रेडिंग ( Delivery Trading )

शेयर बाजार में स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार सबसे ज्यादा उपयोग की जाने वाली Trading डिलीवरी Trading ही है, क्योंकि इसके अंतर्गत Investment सुरक्षित रहता है। डिलीवरी Trading लंबे समय के लिए की जा सकती है, जिसके अंतर्गत Investors अपने Stock को कुछ समय के लिए होल्ड कर सकते हैं।

इसके साथ ही डिलीवरी Trading के अंतर्गत Investors को स्टॉक के लिए पूरी राशि का भुगतान करना होता है। Trading के इस प्रकार के अंतर्गत Investor उस स्टॉक में निवेश कर सकता है जिससे उसे अधिक मुनाफा हो सके।

5. मोमेंटम ट्रेडिंग ( Momentum Trading )

Stock Trading का पांचवा प्रकार मोमेंटम Trading है जिसके अंतर्गत एक Investor या Trader बाजार के मोमेंटम का फायदा उठाता है। यहां पर Trader ऐसे स्क्रिप्ट को चुनता है जो Breakout हो रहे हैं या फिर Breakout हो जाएंगे।

यदि बाजार का मोमेंटम ऊपर उठ रहा है तो Trader के पास जो स्टॉक है वह उन्हें बेच देता है और Average Return से भी ज्यादा रिटर्न प्राप्त करता है। और वहीं अगर बाजार का मोमेंटम नीचे गिर रहा है, तो Trader कई स्टॉक्स को खरीद लेता है ताकि वह उन्हें मोमेंटम बढ़ने पर बेच सके।

6. पोजीशनल ट्रेडिंग ( Positional Trading )

कुछ लोग इसे पोजीशन Trading भी कहते हैं। यह Trading भी Delivery Trading का ही एक रूप है, जिसके अंतर्गत Stocks को Buy and hold करने की Strategies अपनाई जाती है।

Positional Trading उन Traders के लिए ज्यादा बेहतर होती है, जो बाजार में नियमित रूप से भागीदार नहीं होते हैं यानी कि स्टॉक्स की खरीद बिक्री नियमित रूप से नहीं करते हैं।

Positional Trading के अंतर्गत लाभ तब होता है, जब स्टॉक बेचने से पहले उसे लंबे समय तक रखा जा सके।

7. फंडामेंटल ट्रेडिंग ( Fundamental Trading )

Trading के अंतर्गत Traders अच्छे कंपनी के स्टॉक्स ढूंढने के लिए Fundamental Analysis का उपयोग करता है। Traders कंपनी और उसके Financial Details पर अधिक ध्यान देते हैं। ताकि वे ऐसे स्टॉक का चुनाव कर सके जो भविष्य में उन्हें अधिक लाभ दे सके।

Fundamental Trading करने वाले Traders भी बाजार के अंदर अपनी पोजीशन को लंबे समय तक बनाए रखते हैं ताकि वे अधिक लाभ कमा सके।

8. टेक्निकल ट्रेडिंग ( Technical Trading )

Technical Trading के अंतर्गत Traders बाजार के चार्ट और डेटा का उपयोग करके अच्छे Stocks को ढूंढने का प्रयास करते हैं।

इस Trading में व्यापारियों के पास बाजार का ज्ञान और क्षमता होना चाहिए ताकि वह इस चार्ट और ग्राफ को समझ कर सही स्टॉक्स में निवेश कर सके।

FAQ’S:

प्रश्न 1 – ट्रेडिंग के पांच प्रकार कौन से हैं ?

प्रश्न 2 – किस प्रकार का Trading सबसे अच्छा है ?

प्रश्न 3 – स्विंग ट्रेडिंग क्या है ?

प्रश्न 4 – ऑनलाइन ट्रेडिंग क्या है ?

निष्कर्ष :-

आज के इस लेख में हमने Types Of Trading In Hindi के बारे में जानकारी प्राप्त की।

उम्मीद है, कि इस लेख के माध्यम से आपको Trading के प्रकारों के बारे में सभी जानकारियां मिल पाई होंगी।

यदि आप इस लेख से संबंधित और भी जानकारियां पाना चाहते हैं, तो हमसे कमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके पूछ सकते हैं। जानकारी अच्छी लगी हो तो कृपया इस लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें।

शेयर बाजार में चाहते हैं पैसा कमाना तो इन 5 पसंदीदा ट्रेडिंग रणनीतियों के बारे में आपको होगा जानना

शेयर बाजार में ट्रेडिंग की कई रणनीतियां हैं लेकिन यहां पर हम सबसे ज्यादा लोकप्रिय रणनीतियों के बारे में चर्चा स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार कर रहे हैं

ट्रेडर्स चाहें तो हर प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति से जुड़े जोखिम और लागत को समझकर ट्रेडिंग में रणनीतियों के संयोजन का उपयोग भी कर सकते हैं

ट्रेडिंग का मतलब सिक्टोरिटीज को खरीदना और बेचना होता है। ट्रेडिंग भी कई प्रकार की होती हैं। एक दिन से लेकर सालों के लंबे अंतराल के लिए भी ट्रेडिंग की जाती है। इसके साथ ही अलग-अलग बाजारों के माहौल और वहां मौजूद जोखिम से जुड़ी विभिन्न ट्रेडिंग रणनीतियां (trading strategies) शेयरों में कारोबार करने के समय अपनाई जाती हैं।

यहां पर हम कुछ ट्रेडिंग रणनीतियों पर चर्चा कर रहे हैं जो बाकी रणनीतियों में से सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। ये रणनीतियां निवेशकों को तर्कसंगत निवेश निर्णय लेने में मदद कर सकती हैं।

इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday Trading)

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इंट्राडे ट्रेडिंग जिसे डे ट्रेडिंग के रूप में भी जाना जाता है। ये ऐसी ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें निवेशक एक ही दिन में शेयरों को खरीदते और बेचते हैं। वे शेयर बाजार के बंद होने के समय से पहले ट्रेडिंग बंद कर देते हैं। एक ही दिन में वे मुनाफा और घाटा बुक करते हैं।

निवेशक इन शेयरों में एक दिन में कुछ सेकंड, घंटे के लिए या इसमें दिन भर में कई बार ट्रेड ले सकते हैं। इसलिए इंट्राडे एक अत्यधिक वोलाटाइल ट्रेडिंग रणनीति मानी जाती और इसके लिए तेजी से निर्णय लेना होता है।

पोजीशनल ट्रेडिंग (Positional Trading)

पोजिशनल ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जहां शेयर्स को महीनों या सालों के लंबे समय तक रखा जाता है। ऐसे शेयरों में समय के साथ भाव में बड़ी बढ़त की अपेक्षा के साथ मुनाफा कमाने की उम्मीद की जाती है। निवेशक आमतौर पर फंडामेंटल एनालिसिस के साथ कंपनी का टेक्निकल ग्राउंड देखकर इस शैली को अपनाते हैं।

इसलिए इस प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति में आमतौर पर बाजार के रुझान और उतार-चढ़ाव जैसी अल्पकालिक जटिलताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

स्विंग ट्रेडिंग (Swing Trading)

स्विंग ट्रेडिंग आमतौर पर एक ऐसी रणनीति है जहां निवेशक शेयरों के भाव में और तेजी की उम्मीद में एक दिन से अधिक समय तक शेयरों को अपने पास रखते हैं। स्विंग ट्रेडर्स आने वाले दिनों में बाजार की गतिविधियों और रुझानों की भविष्यवाणी करने के लिए जाने जाते हैं।

इंट्राडे ट्रेडर्स और स्विंग ट्रेडर्स के बीच स्टॉक को अपने पास रखने की समय सीमा में महत्वपूर्ण अंतर होता है। इसलिए कहा जाता है कि ज्यादातर टेक्निकल ट्रेडर्स स्विंग ट्रेडिंग की कैटेगरी में आते हैं।

टेक्निकल ट्रे़डिंग (Technical Trading)

टेक्निकल ट्रेडिंग में ऐसे निवेशक शामिल हैं जो शेयर बाजार में प्राइस चेंज की भविष्यवाणी करने के लिए अपने तकनीकी विश्लेषण ज्ञान का उपयोग करते हैं। इस ट्रेडिंग शैली में कोई विशेष समय-सीमा नहीं होती है क्योंकि यह एक दिन से लेकर महीनों तक के लिए भी हो सकती है।

बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने के लिए अधिकांश ट्रेडर्स अपने टेक्निकल एनालिसिस स्किल्स का उपयोग करते हैं। हालांकि स्टॉक की कीमतों का निर्धारण करते समय सबसे महत्वपूर्ण टेक्निकल एनालिसिस बाजार की परिस्थिति होती है।

फंडामेंटल ट्रेडिंग (Fundamental Trading)

फंडामेंटल ट्रेडिंग का मतलब स्टॉक में निवेश करना होता है जहां ट्रेडर्स समय के साथ भाव में तेजी की उम्मीद के साथ कंपनी के स्टॉक को खरीदता है। इस तरह की ट्रेडिंग में 'बाय एंड होल्ड' रणनीति में विश्वास किया जाता है।

इस प्रकार की ट्रेडिंग आमतौर पर कंपनी के फोकस्ड इंवेंट्स में किया जाता है। इसके लिए फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स, नतीजों, ग्रोध और मैनेजमेंट क्वालिटी का सावधानीपूर्वक विश्लेषण किया जाता है।

मिंट में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ये ट्रेडिंग रणनीतियाँ बहुत काम की होती हैं और निवेशक को उस ट्रेडिंग शैली पर निर्णय लेने में मदद करती हैं जिसे वे अपनाना चाहते हैं। प्रत्येक प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति से जुड़े जोखिम और लागत की गहन समझ के साथ ट्रेडर्स चाहें तो रणनीतियों के संयोजन का उपयोग करके भी शेयरों में खरीद-फरोख्त कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: (यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना हेतु दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।)

What is Stock Trading and types of trading ? स्टॉक ट्रेडिंग क्या है ओर कितने प्रकार कि होती है ?

आज हम ट्रेडिंग के बारे में जान ने वाले है । दोस्तो आप अगर शेयर मार्केट में नये हो तो आपको इस कन्सेप्ट को समझना बहुत जरुरी है। क्यू कि शेयर मार्केट में हम नये होते है कुछ समझ में नहीं आता क्या करना है। ऐसें वक्त में हमे शेयर मार्केट कि एक एक concept को समझना जरुरी होता है उसके सीवा हम आगे बड नहीं सकते ओर यह समझना भी जरुरी हि है । दोस्तो अगर हमे बेसिक कन्सेप्ट के बारे में हि पता नहीं होगा तो हम आगे काम कैसे करेंगे ओर शेयर मार्केट से पैसे कैसे कमा सकते है इसलीये इन कन्सेप्ट को समझना चाहीए।

What is Stock Trading and types of trading ?

शेयर / स्टॉक ट्रेडिंग क्या है ?

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग करना यांनी किसी कंपनी के शेयर को कम किंमत पर खरीदना ओर उसका भाव यांनी किंमत बड ने पर बेच देना इससे जो लाभ होता हे उसे मूनाफा कहते है, लेकिन कही बार शेयर कि किंमत घट जाती है तो नुकसान भी हो सकता है । इसके लिए हमें उस कंपनी के बारे में अच्छे से जानकारी होनी चाहीए उस पर रिसर्च किया होणा चाहिए।

यह उसी प्रकार है जैसे हम किसी चीज का व्यापार या धंदा करते है जीसमे कम टाइम में हमे वह चीज को बेच ना होता है जेसें मंडी मार्केट में हम सुबह कोई सब्जी 10 रु kg के भाव से बेचने के लिए लेते है ओर शाम तक उसे 20 रु kg के हिसाब से बेच देते है जिससे हमे मूनाफा हो जाता है । लेकिन कही बार सब्जी अगर बेची नहीं गयी तो हमे नुकसान भी उठाना पडता है । उसी प्रकार शेयर ट्रेडिंग भी होती है। शेयर ट्रेडिंग में भी कही सारे प्रकार कि ट्रेडिंग होती है उन्हे हम आगे समझ लेते है ।

ट्रेडिंग के प्रकार :

1 ) Intraday Trading

( इंट्राडे ट्रेडिंग):

Intraday trading यांनी मान लो हमने आज किसी कंपनी के शेयर को खरीदा ओर मार्केट बंद होणे से पहले उसे बेच दिया इसे intraday trading कहा जाता है। इस तरह के ट्रेडिंग के प्रकार में आपको उसी दिन शेयर को बेच ना होता है । फिर चाहे आपको प्रॉफिट हो या लॉस हमे उसी दिन अपनी position को बंद करना होता है , स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार इस ट्रेडिंग के प्रकार में रिस्क बहुत जादा होता है ओर प्रॉफिट भी ज्यादा कमा सकते है । यह ट्रेडिंग उन्हे हि करणी चाहीए जिनोने शेयर मार्केट को अच्छे से समझ लिया हो या फिर किसी के गाईडन्स में यांनी जो व्यक्ती को इसका अच्छा अनुभव हो उनसे आप सिख सकते हो । intraday में हमे ब्रोकर कि ओर से मार्जिन money कि facility भी मिलती है । यांनी हम हमारे कॅपिटल से ज्यादा शेयर खरीद सकते है। जेसें अगर हमारे ट्रेडिंग अकाउंट में 10 हजार रु है ओर हमे 3× मार्जिन मिल रही है तो हम 30 हजार किंमत के शेयर खरीद सकते है यह अलग अलग ब्रोकर कि कम जादा हो सकती है। लेकिन मार्जिन मनी का फायदा ओर नुकसान दोनो है । इसे आपको समझना होगा । अगर आपको मार्केट के उतार चढाव के बारे में अच्छे से जानकारी हो तभी आप यह facility ले ।

2 ) Swing Trading

( स्विंग ट्रेडिंग ) ;

इस प्रकार कि ट्रेडिंग कुछ दिन या कुछ हफ्ते के लिए कि जाती है जो कि intrday जेसे हि होती है लेकिन इसमें आपको उसी दिन शेयर को बेचना नहीं होता है । हम कुछ दिनो या हफ्तो के लिये position होल्ड कर सकते है ओर मूनाफा होणे के बाद बाहर निकाल सकते है । यह ट्रेडिंग बहुत हि पॉप्युलर type है। यह ट्रेडिंग पार्ट टाइम ट्रेडर के लिए बहुत हि फायदेमंद है क्यू कि वह intraday trading जेसे मार्केट पुरे दिन watch नहीं कर सकते है । यह ट्रेडिंग के प्रकार में हम हमारे प्रॉफिट टार्गेट सेट कर सकते है, achive होणे पर हम exit हो सकते है । स्विंग ट्रेडिंग में हमे अच्छे रिटर्न मिलने के चान्स ज्यादा होते है ओर रिस्क कम होती है । इस ट्रेडिंग को ट्रेडिंग किंग भी कहते है ।

3) Short Term Trading :

( शॉर्ट टर्म ट्रेडिंग ) :

Short Term Trading इस ट्रेडिंग का नाम हि हमे इसके बारे में बता देता है कि यह ट्रेडिंग type में कुछ weeks से लेकर कुछ months तक हम हमारा ट्रेंड ऍक्टिव्ह रख ते है ओर जेसे हि हमे हमारे शेयर का टार्गेट price मिल जाता है तो हम ट्रेंड को close कर देते है। यह ट्रेडिंग भी बहुत पॉप्युलर है ।बस आपको किसी भी शेयर में यह ट्रेडिंग करणी हो तो आपको उस शेयर कि काफी रिसर्च करणी होती है । तब जाकर आप अच्छे से प्रॉफिट बना सकते हो ।

4 ) Long Term Trading

( लोन्ग टर्म ट्रेडिंग ) :

Long Term Trading भी एक अच्छा option है जीसमे कुछ माहिनो से लेकर कुछ साल तक हम ट्रेड ले सकते है । ओर टार्गेट Achive होणे पर हम position exit कर देते है । इसमें हमे daily के मार्केट उतार चढाव पर नजर नहीं रखनी होती है । यह एक बेस्ट option है जिनके पास कम टाइम है ओर वह रोजाना मार्केट को watch नहीं कर सकते । इसमें रिस्क ज्यादा नहीं होता है,ओर कही बार अगर कंपनी अगर डिवीडेन्ट ओर बोनस प्रदान करती है स्टॉक ट्रेडिंग के प्रकार तो उसका भी लाभ हमे मिल जाता है ।

आपको यह जानकारी कैसी लगी कॉमेंट में अपनी राय जरूर दे और अपने दोस्तो से शेयर करना न भुले

कम समय में चाहते हैं मोटा मुनाफा, तो आप ट्रेडिंग ऑप्शन पर लगा सकते हैं दांव

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी से मोटा मुनाफा संभव है.

शेयर मार्केट में ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी से मोटा मुनाफा संभव है.

शेयर मार्केट के संबंध में अक्सर ट्रेंडिंग और निवेश शब्द सुनने को मिलते हैं. हालांकि, दोनों माध्यमों में निवेशकों का मकस . अधिक पढ़ें

  • News18Hindi
  • Last Updated : June 11, 2022, 14:52 IST

नई दिल्ली . शेयर मार्केट संबंधित चर्चा होते ही अक्सर ट्रेंडिंग और निवेश शब्द सुनने को मिलते हैं. कई लोग ट्रेडिंग और निवेश में फर्क नहीं कर पाते हैं. तो आपको बता दें कि ट्रेडिंग और निवेश के बीच सबसे अहम अंतर समय अवधि का है. निवेश की तुलना में ट्रेडिंग में समय अवधि काफी कम होती है. ट्रेडिंग कई प्रकार की होतीं हैं और ट्रेडर्स स्टॉक में अपनी पॉजिशन बहुत कम समय तक रखते हैं, जबकि निवेश वे लोग करते हैं, जो स्टॉक को वर्षों तक अपने पोर्टफोलियो में रखते हैं. अगर आप कम समय में मोटा मुनाफा चाहते हैं, तो ट्रेडिंग आपके लिए बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकती है.

सिक्योरिटीज की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया को ट्रेडिंग कहते हैं. फाइनेंसियल मार्केट की स्थिति और जोखिम के आधार पर ट्रेडिंग की विभिन्न स्ट्रेटेजी हैं. ट्रेडर्स अपने वित्तीय लक्ष्य के हिसाब से इनका चयन करते हैं. साथ ही विभिन्न प्रकार की ट्रेडिंग से जुड़े रिस्क और लागत को भी ध्यान में रखते हैं. आइए, यहां हम उन लोकप्रिय ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी की चर्चा करते हैं, जो अधिकतर ट्रेडर अपनाते हैं.

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इंट्राडे ट्रेडिंग

शेयर बाजार में महज 1 दिन के कारोबार में भी मोटा प्रॉफिट कमाया जा सकता है. दरअसल, बाजार में एक ही ट्रेडिंग डे पर शेयर खरीदने और बेचने को इंट्राडे ट्रेडिंग (Intraday trading) कहते हैं. इस स्ट्रेटेजी के तहत शेयर खरीदा तो जाता है, लेकिन उसका मकसद निवेश नहीं, बल्कि 1 दिन में ही उसमें होने वाली बढ़त से प्रॉफिट कमाना होता है. इसमें चंद मिनटों से ले कर कुछ घंटे तक में ट्रेडिंग हो जाती है. हालांकि, यह जरूरी नहीं कि इंट्रोडे ट्रेडर्स को हमेशा प्रॉफिट ही होता हो. ट्रेडर्स अपना ट्रेड शेयर मार्केट बंद होने से पहले बंद करते हैं और प्रॉफिट या लॉस उठाते हैं. इसमें तेजी से निर्णय लेना होता है.

पॉजिशनल ट्रेडिंग

पॉजिशनल ट्रेडिंग (Positional trading) स्टॉक मार्केट की एक ऐसी ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी है, जिसमें स्टॉक को लंबे समय तक होल्ड किया जाता है. इस स्ट्रेटेजी के तहत ट्रेडर्स किसी स्टॉक को कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक के लिए खरीदते हैं. उसके बाद उस स्टॉक को बेच कर प्रॉफिट या लॉस लेते हैं. उनका मानना होता है कि इतनी अ​वधि में शेयर के दाम में अच्छी बढ़ोतरी होगी. निवेशक आमतौर पर फंडामेंटल एनालिसिस के साथ टेक्निकल ग्राउंड को ध्यान में रखकर फंडामेंटल एनालिसिस के साथ टेक्निकल को ध्यान में रखकर यह स्ट्रेटेजी अपनाते हैं.

स्विंग ट्रेडिंग

स्विंग ट्रेडिंग (Swing trading) में टाइम पीरियड इंट्राडे से अधिक होता है. कोई स्विंग ट्रेडर अपनी पॉजिशन 1 दिन से अधिक से लेकर कई हफ्तों तक होल्ड कर सकता है. बड़े टाइम फ्रेम में वोलैटिलिटी कम होने के साथ प्रॉफिट बनाने की संभावना काफी अधिक होती है. यही कारण है कि अधिकतर लोग इंट्राडे की अपेक्षा स्विंग ट्रेडिंग करना पसंद करते हैं.

टेक्निकल ट्रेडिंग

टेक्निकल ट्रेडिंग (technical trading) में निवेशक मार्केट में मूल्य परिवर्तन की भविष्यवाणी करने के लिए अपने टेक्निकल एनालिसिस ज्ञान का उपयोग करते हैं. हालांकि, इस ट्रेडिंग के लिए कोई समय-सीमा निर्धारित नहीं है. इसमें पॉजिशन 1 दिन से लेकर कई महीने तक रखा जा सकता है. शेयर मार्केट में कीमतों में उतार-चढ़ाव को निर्धारित करने के लिए अधिकतर ट्रेडर्स अपने टेक्निकल एनालिसिस स्किल का उपयोग करते हैं. टेक्निकल एनालिसिस के तहत देखा जाता है कि किसी खास समय अवधि में किसी शेयर की कीमत में कितना उतार-चढ़ाव आया. इस अवधि में इसकी ट्रेड की गई संख्या में क्या कभी कोई बड़ा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है.

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